स्वदृष्टि फाउंडेशन

पाठ 3 / 6 · 6 मिनट

AI में क्या कभी न डालें

सीधी बात

जो जानकारी किसी व्यक्ति की पहचान बताती है (नाम के साथ फ़ोन, पता, आधार, PAN, बैंक खाता) या जिससे पैसे तक पहुँच बनती है (पासवर्ड, OTP), उसे आम AI tools में कभी न डालें। काम करवाना हो तो पहले नाम-नंबर हटाइए। भारत का data protection क़ानून भी कारोबारों से निजी जानकारी सावधानी से रखने की अपेक्षा करता है।

AI tool में कुछ भी चिपका देना बहुत आसान है: ग्राहक की पूरी शिकायत, किसी कर्मचारी की salary slip, बैंक statement। काम झट से हो जाता है। पर एक सवाल अक्सर छूट जाता है: यह जानकारी अब कहाँ जा रही है?

यह पाठ सामान्य जानकारी है, क़ानूनी सलाह नहीं।

कभी न डालें

  • पहचान बताने वाली जानकारी: ग्राहक या कर्मचारी का नाम एक साथ फ़ोन नंबर, पते, आधार या PAN के साथ।
  • पैसे तक पहुँचने वाली जानकारी: बैंक खाता नंबर, UPI PIN, पासवर्ड, OTP।
  • कर्मचारियों का निजी data: salary, स्वास्थ्य, परिवार की जानकारी।
  • आपके कारोबार के राज़: ख़ास रेट लिस्ट, किसी बड़े ग्राहक का पूरा contract। यह आपका फ़ैसला है, पर सोचकर।

काम भी हो जाए, जानकारी भी बचे

AI से काम लेना छोड़ने की ज़रूरत नहीं है। बस थोड़ी सफ़ाई कीजिए:

  1. नाम और नंबर हटाइए। “रमेश जी, 98xxxxxx, गली नंबर 4” की जगह लिखिए “ग्राहक A”।
  2. सिर्फ़ उतना डालिए जितना ज़रूरी है। पूरा statement नहीं, सिर्फ़ वह हिस्सा जिस पर सवाल है।
  3. settings देखिए। कई tools में chat history और “model को सिखाने” का विकल्प बंद किया जा सकता है।
  4. कारोबार और निजी खाते अलग रखिए। दफ़्तर का काम निजी AI account से न कीजिए।

एक उदाहरण (काल्पनिक)

साहिबाबाद की एक इकाई में office का एक लड़का ग्राहकों की बकाया सूची, जिसमें नाम, फ़ोन और रक़म है, AI में डालकर reminder मैसेज बनवाता है। काम सही हुआ, पर ग्राहकों की पूरी सूची एक बाहरी tool तक पहुँच गई। यही काम “ग्राहक A, B, C” और बिना फ़ोन नंबर के भी उतना ही अच्छा हो जाता।

क़ानून क्या कहता है (सामान्य जानकारी)

भारत में Digital Personal Data Protection Act, 2023 लागू है। सीधे शब्दों में, यह क़ानून कारोबारों से अपेक्षा करता है कि लोगों की निजी जानकारी उनकी सहमति और ज़रूरत के हिसाब से ही इस्तेमाल हो, और उसकी सुरक्षा की जाए। आपके कारोबार पर इसकी कौन-सी शर्तें कब से लागू होती हैं, इसके लिए अपने वकील या CA से बात कीजिए।

इस पाठ के उदाहरण काल्पनिक हैं, साहिबाबाद जैसे औद्योगिक इलाक़ों की आम इकाइयों को ध्यान में रखकर लिखे गए हैं। स्वदृष्टि के field diagnostics से असली (नाम बदले हुए) उदाहरण आने पर इन्हें बदला जाएगा।

इस हफ़्ते आज़माएँ

अपनी टीम के साथ 10 मिनट बैठिए और पूछिए: कौन किस AI tool में क्या डालता है? एक काग़ज़ पर 'कभी नहीं' वाली सूची बनाइए (आधार, PAN, बैंक, पासवर्ड, OTP, ग्राहक की पूरी जानकारी) और उसे सबके सामने लगाइए।

आम सवाल

अगर गलती से डाल दिया हो तो?

उस chat को delete कीजिए और tool की settings में history बंद कीजिए। अगर पासवर्ड या OTP डाला था, तो उसे तुरंत बदल दीजिए। बैंक से जुड़ी जानकारी थी तो बैंक को सूचित कीजिए।

क्या paid AI tools सुरक्षित होते हैं?

कई paid और business plans में आपकी जानकारी से model को न सिखाने का विकल्प होता है, पर हर tool अलग है। tool की privacy settings और शर्तें पढ़िए; शक हो तो जानकारी मत डालिए।

क्या यह क़ानूनी सलाह है?

नहीं। यह सामान्य जानकारी है। अपने कारोबार पर क़ानून कैसे लागू होता है, इसके लिए अपने वकील या CA से सलाह लीजिए।