स्वदृष्टि फाउंडेशन

पाठ 5 / 6 · 6 मिनट

Deepfake और धोखाधड़ी वाले कॉल

सीधी बात

AI से अब किसी की आवाज़ या चेहरे की नक़ल बनाना आसान है। ठग इसका इस्तेमाल मालिक या supplier बनकर जल्दी पैसा भेजने को कहने में करते हैं। बचाव के लिए तीन आदतें काफ़ी हैं: पैसे की हर जल्दबाज़ी वाली माँग पर पहले से जाने हुए नंबर पर वापस फ़ोन, बैंक खाता बदलने की हर सूचना की फ़ोन से पुष्टि, और बड़ी रक़म पर दो लोगों की मंज़ूरी।

AI सिर्फ़ काम आसान नहीं करता, ठगी भी आसान करता है। जो तकनीक मैसेज लिखती है, वही किसी की आवाज़ की नक़ल भी बना सकती है।

ठगी के तीन आम तरीक़े

1. “मालिक” का फ़ोन। accountant के पास मालिक की आवाज़ में फ़ोन आता है: “अभी एक supplier को पैसे भेज दो, मैं meeting में हूँ, बाद में बात करता हूँ।” आवाज़ बिल्कुल वैसी, जल्दबाज़ी पूरी।

2. “supplier” का नया बैंक खाता। एक invoice या मैसेज आता है जो बिल्कुल पुराने supplier जैसा दिखता है, पर उसमें बैंक खाता बदला हुआ है। पैसा ठग के खाते में चला जाता है।

3. “अधिकारी” का वीडियो कॉल। कोई ख़ुद को पुलिस, टैक्स या किसी एजेंसी का अधिकारी बताकर डराता है और “मामला निपटाने” के लिए पैसे माँगता है।

तीनों में एक बात समान है: जल्दबाज़ी, और सामान्य प्रक्रिया को छोड़ने का दबाव।

एक उदाहरण (काल्पनिक)

साहिबाबाद की एक इकाई में शनिवार शाम accountant के पास मालिक की आवाज़ में कॉल आता है, एक “नए supplier” को तुरंत पैसा भेजने के लिए। accountant को नियम याद है: वह कॉल काटकर मालिक के सेव किए हुए नंबर पर वापस फ़ोन करता है। मालिक को ऐसे किसी कॉल की जानकारी ही नहीं थी। एक फ़ोन कॉल ने पूरा पैसा बचा लिया।

बचाव की तीन आदतें

  1. वापस फ़ोन कीजिए। पैसे की किसी भी जल्दबाज़ी वाली माँग पर, चाहे आवाज़ कितनी भी जानी-पहचानी लगे, कॉल काटिए और पहले से सेव नंबर पर ख़ुद फ़ोन कीजिए।
  2. खाता बदले तो पुष्टि कीजिए। supplier का बैंक खाता बदलने की हर सूचना पुराने, जाने हुए नंबर पर फ़ोन करके पक्की कीजिए। ईमेल या मैसेज पर भरोसा मत कीजिए।
  3. बड़ी रक़म पर दो मंज़ूरी। एक तय रक़म से ऊपर का हर payment दो लोग मंज़ूर करें। ठग के लिए दो लोगों को एक साथ धोखा देना कहीं मुश्किल है।

साथ में एक पारिवारिक या दफ़्तर का कोड शब्द रखिए, जो असामान्य माँग पर पूछा जाए।

शिकायत कहाँ करें

धोखा हो जाए या शक हो, तो देर मत कीजिए:

  • हेल्पलाइन 1930 पर कॉल कीजिए।
  • cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज कीजिए।
  • अपने बैंक को तुरंत सूचित कीजिए।

इस पाठ के उदाहरण काल्पनिक हैं, साहिबाबाद जैसे औद्योगिक इलाक़ों की आम इकाइयों को ध्यान में रखकर लिखे गए हैं। स्वदृष्टि के field diagnostics से असली (नाम बदले हुए) उदाहरण आने पर इन्हें बदला जाएगा।

इस हफ़्ते आज़माएँ

अपने accountant और परिवार के साथ एक 'कोड शब्द' तय कीजिए, जो फ़ोन पर पैसे की किसी भी असामान्य माँग पर पूछा जाएगा। और एक नियम लिखकर लगाइए: एक तय रक़म से ऊपर का कोई भी payment दो लोगों की मंज़ूरी के बिना नहीं जाएगा।

आम सवाल

क्या नक़ली आवाज़ सच में असली जैसी लगती है?

हाँ, कुछ सेकंड की रिकॉर्डिंग से भी काफ़ी मिलती-जुलती आवाज़ बन सकती है। इसलिए आवाज़ पहचानकर भरोसा मत कीजिए। नंबर और प्रक्रिया पर भरोसा कीजिए।

धोखा हो जाए तो सबसे पहले क्या करें?

तुरंत 1930 पर कॉल कीजिए या cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज कीजिए, और अपने बैंक को सूचित कीजिए। जितनी जल्दी शिकायत होती है, पैसा रुकवाने की संभावना उतनी बढ़ती है।

कोई 'पुलिस' या 'अधिकारी' बनकर वीडियो कॉल पर डराए तो?

कॉल काट दीजिए। सरकारी एजेंसियाँ वीडियो कॉल पर गिरफ़्तारी या पैसे की माँग नहीं करतीं। ऐसे कॉल की शिकायत 1930 या cybercrime.gov.in पर कीजिए।